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Showing posts from June, 2020

Buddha

महात्मा बुद्ध कौन थे? इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं कि जैसा हमें जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सत्संग से जानकारी मिली है। महात्मा बुद्ध स्वर्ग लोक से आए हुए एक बहुत ही पुण्यकर्मी आत्मा (प्राणी) थे। महात्मा बुद्ध राजा का लड़का था। महात्मा बुद्ध ने स्वर्ग में प्राप्त सुख की खोज में घर और राज को भी त्याग दिया। परमात्मा  प्राप्ति के लिए वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति साधना देने वाला कोई संत उन्हें नहीं मिला। जिसके फलस्वरूप और पूर्व जन्म के संस्कार और पुण्य कर्म के आधार पर उसने मनाने ढंग से हठ योग करना शुरू कर दिया।] हठयोग द्वारा में उसने आहार भी त्याग दिया। गया (बिहार) के अंदर एक वट वृक्ष के नीचे बैठकर महीनों तक हठयोग साधना की। जिससे इनका शरीर भी अस्ती -पंजर ही शेष रह गया और मारणासन्न अवस्था में पहुंच गया।तब   एक माई (माता) ने महात्मा बुद्ध को खीर चटाई। जिससे महात्मा बुद्ध के प्राण बच गए। उसके बाद उसने पेट भर कर अन्न का आहार किया। जिसके बाद उन्होंने अपना एक सिद्धान्त बना लिया कि भूखा रहने से परमात्मा प्राप्ति नहीं हो सकती है और उसे जनता में प्रचार क...

#GodKabir_PrakatDiwas_2020 #पूर्णसंतरामपालजी

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*कबीर साहेब का प्राकट्य* ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर जी काशी के लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। इस लीला को ऋषि अष्टानन्द जी ने आंखों देखा। वहाँ से नीरू-नीमा परमेश्वर कबीर जी को अपने घर ले आये। गरीब, काशीपुरी कस्त किया, उतरे अधर उधार। मोमन कूं मुजरा हुआ, जंगल में दीदार।। स्वामी रामानंद जी ने अष्टानन्द जी से कहा, जब कोई अवतारी शक्ति पृथ्वी पर लीला करने आती है तो ऐसी घटना होती है। " *कबीर साहेब की बाल लीलाएं*" :- कबीर परमेश्वर शिशु रूप में में काशी में अवतरित हुए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था। बालक को देखने के लिए ऊपर से सूक्ष्म रूप में देवता भी आए। गरीब, गोद लिया मुख चूंबि कर, हेम रूप झलकंत। जगर मगर काया करै, जैसे दमकैं पदम अनंत।। काशी में जो भी बालक (कबीर परमात्मा) को देखता वही अन्य को बताता कि नूर अली को एक बालक तालाब पर मिला है आज ही उत्पन...

#कबीरपरमेश्वर_की_लीलाएं #3दिन_बाद_कबीरप्रकटदिवस

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कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की।

#Miracles_Of_GodKabir

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"Maharishi Sarbananda's mother to cure Sarada's disease"  There was a maharishi named Sarvanand.  His venerable mother, Mrs. Sharada Devi was suffering from the sin of karma.  He received a sermon from the Kabir God and on the same day, the pain was relieved.  Because the holy Yajurveda chapter 5 mantra 32  It is written that "Kavirangharirisi" means (Kavir) Kabir (Anghari) is the enemy of sin (Asi).  Then in this holy Yajurveda Chapter 8 Mantra 13 it is written that God (Enas: Anas) eliminates the iniquity of unrighteousness, that is, the sin of sins.