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Showing posts from May, 2020

मानव का उत्थान

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मानव का उत्थान पाठकों आज हम निम्न आर्टिकल से जानेंगे कि मानव उत्थान क्या है इसकी आवश्यकता क्यों है? भूमिका  आज के दौर में मानव भौतिक वाद🏢🚗🏍️📱📺 से आकर्षित होकर पतन के गर्त में इतना गिर गया है कि वह सच्चे और मूल मानवीय मूल्यों जैसे दया, सहिष्णुता,भाईचारा,आदर,सहयोग को भी भूल गया है।  जिसके कारण आज चारों ओर अराजकता और अशांति पैदा हो चुकी है। यदि अब भी मानव नहीं जागा तो फिर उसके अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगना स्वाभाविक है। *मानव उत्थान कैसे हो सकता है? जब तक मानव को उसके मूल उद्देश्य और कर्तव्य का ज्ञान नहीं होता है तब तक उसका उत्थान होना सम्भव नहीं है। *जब तक रिश्वतखोरी,जमाखोरी,ठगी, बेरोज़गारी,गरीबी, केवल मैं और मेरा परिवार जैसी मानसिकता है तब तक मानव का उत्थान नहीं हो सकता है। *समाधान *यदि मनुष्य का उत्थान हो सकता है तो केवल उसकी संकीर्ण मानसिकता के त्याग के द्वारा ही हो सकता है। *अब प्रश्न उठता उठता है कि मानव अपनी संकीर्ण मानसिकता को कैसे त्याग सकता है। *यदि मानव को सच्चा सत्संग 🔜 https://youtu.be/9aSzKI4TMAE  सुनने को मिल जाए और उसे भगवान के वि...

शिक्षा का खराब स्तर

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शिक्षा का खराब स्तर दोस्तों, आज हम बात करेंगे भारत में शिक्षा के स्तर की खराब स्थिति के बारे में। क्या आप जानते हैं कि हमारे देश भारत की शिक्षा के स्तर में बहुत ही खराब स्थिति है। विश्व बैंक की  2018 की रिपोर्ट के अनुसार भारत का शिक्षा का स्तर बहुत ही कमजोर हैं। आपको आश्चर्य होगा कि भारत में दो तिहाई बच्चे बुनियादी शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। आज हम इन्हीं बिंदुओं के आधार पर चर्चा करेंगे। कि.... 1.आखिर इसका कारण क्या है कि हम 21 वीं सदी में आने के बाद भी बेसिक शिक्षा में भी इतने पिछड़े हुए क्यों हैं?                  जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत विकासशील देशों की सूची में आता है। जहां पर अभी भी बेरोज़गारी, गरीबी जैसी भयानक समस्याएं व्याप्त हैं। जिसके कारण लोगों का जीवन स्तर भी निम्न है। लोगों की आय का शिक्षा के स्तर में वृद्धि के लिए बहुत बड़ा योगदान होता है। जाहिर सी बात है कि अगर व्यक्ति भूखा है तो सबसे पहले वह भूख को शांत करने के लिए प्रयास करेगा न कि शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रयत्न करेगा। इसलिए सरकार और सभी ए...

सच्चा भगवान कौन हैं?

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पाठकों आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से जानेंगे कि आखिर सच्चा भगवान है कौन? वह कहां रहता है?वह साकार है या निराकार? वह अब तक किसको मिला है? भगवान हमको कैसे मिलेगा? इस आर्टिकल में आपको ऐसे कई सवालों का जवाब मिलेगा जिनको जानने के लिए हम बचपन से ही लालायित रहते हैं। लेकिन आज तक हमें इन सवालों का जवाब नहीं मिला। उन सभी प्रश्नों के उत्तर आज हम जानेंगे। तो आइए सच्चे भगवान के बारे में जानते हैं। इसके लिए हम निम्न लिखित बिंदुओं पर प्रकाश डालते हैं। *सच्चा भगवान कौन हैं? *वह कहां रहता है? *वह साकार है या निराकार? *यदि साकार है तो दिखाई क्यों नहीं देता है? *यदि निराकार है तो फिर उसने इस सृष्टि की रचना कैसे की? *भगवान दयालु है तो फिर यहां इतने दुःख और कष्ट क्यों हैं? *क्या भगवान को किसी ने देखा है? *अगर भगवान को पाया जा सकता है तो अभी तक किस किसको भगवान की प्राप्ति हुई है? *हमको भगवान कैसे मिलेगा? *सच्चा भगवान कौन हैं? जैसा कि हम सभी जानते हैं कि लोग प्राय: कहते हैं कि सबका मालिक एक है लेकिन सभी अलग अलग भगवानों को मानते हैं और पूजते हैं। जैसे कि पवित्र मुस्लिम धर्म के मानने वाले लोग क...

एकल परिवार बनाम संयुक्त परिवार

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जब से हमारे भारतीय समाज में पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति ने प्रवेश किया है तभी से संयुक्त परिवार का अपघटन और एकल परिवार का विस्तार होने लगा है। आखिर क्या कारण है कि आज  की युवा पीढ़ी एकल परिवार की पक्षधर है? इसके कई कारण हैं:- 1. दखलअंदाज़ी नापसंद:- आज का युवा वर्ग स्वतंत्रता को पसंद करता है। वह अपने परिवार जैसे, माता पिता, बड़े भाई बहिन या अन्य किसी भी पारिवारिक सदस्य को अपनी व्यक्तिगत जीवन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पसंद नहीं करता है। जब उसपर परिवार की मर्यादाओं या अन्य पारिवारिक नियमों का पालन करने के लिए  बाध्य किया जाता है तो वह इसे अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में बाधा मानता है और फलतः वह अलग हो जाता है और इस प्रकार से एक एकल परिवार का निर्माण हो जाता है।

शिक्षा और संस्कार

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सामान्यतया देखने में आता है लोग उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात भी एक सुसभ्य संस्कार प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इसका कारण क्या है? १. सामान्य तौर पर लोग अपने विचार और व्यवहार में बदलाव नहीं ला पाते हैं इसमें उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और आसपास का वातावरण जिम्मेदार होता है। 2. वे शुरू से ही नकारात्मक विचारों से प्रभावित रहते हैं और हर कार्य में संशय बना कर रखते हैं। 3. कुसंगत भी इसका मुख्य कारण हैं। कुसंगत में व्यक्ति को केवल गलत कार्यों को करने का ही प्रोत्साहन मिलता रहता है। 4. पूर्ण संत के सत्संग का अभाव भी इसमें मुख्य भूमिका निभाता है। जब तक व्यक्ति पूर्ण संत के सत्संग नहीं सुनता है तब तक उसे परमात्मा के विधान का मालूम नहीं होता है और वह अपना व्यवहार नहीं सुधार पाता है।