प्राचीन काल से ही मानव जीवन को अपने लौकिक और पारलौकिक दिशा निर्देश की की आवश्यकता रही हैं।
इसके लिए हमारे ऋषि, मुनि और धर्मशास्त्रों ने हमारा मार्गदर्शन किया है।
रक्षा बंधन
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
प्रस्तावना
त्यौहार मनाना पूरे मानव समाज की विशेष परम्परा रही है। वैसे तो कई देशों में कई प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं।
संतों की शिक्षा जैसा कि हम जानते हैं भारतवर्ष में अनेकों संत आए हैं जिन्होंने बहुत से भक्ति मार्ग बताएं। अधिक जानकारी के लिए पढ़े संत रामपाल जी महाराज द्वारा रचित निशुल्क पुस्तक सेवा मंगवाएं और जाने हमारे धर्म के अनेको ऐसे गूढ़ रहस्यों को। कॉमेंट करे अपना पूरा नाम, पता व मोबाइल नंबर। अधिक जानकारी के लिए 👉 यहां क्लिक करे....
शिक्षा का खराब स्तर दोस्तों, आज हम बात करेंगे भारत में शिक्षा के स्तर की खराब स्थिति के बारे में। क्या आप जानते हैं कि हमारे देश भारत की शिक्षा के स्तर में बहुत ही खराब स्थिति है। विश्व बैंक की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार भारत का शिक्षा का स्तर बहुत ही कमजोर हैं। आपको आश्चर्य होगा कि भारत में दो तिहाई बच्चे बुनियादी शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। आज हम इन्हीं बिंदुओं के आधार पर चर्चा करेंगे। कि.... 1.आखिर इसका कारण क्या है कि हम 21 वीं सदी में आने के बाद भी बेसिक शिक्षा में भी इतने पिछड़े हुए क्यों हैं? जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत विकासशील देशों की सूची में आता है। जहां पर अभी भी बेरोज़गारी, गरीबी जैसी भयानक समस्याएं व्याप्त हैं। जिसके कारण लोगों का जीवन स्तर भी निम्न है। लोगों की आय का शिक्षा के स्तर में वृद्धि के लिए बहुत बड़ा योगदान होता है। जाहिर सी बात है कि अगर व्यक्ति भूखा है तो सबसे पहले वह भूख को शांत करने के लिए प्रयास करेगा न कि शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रयत्न करेगा। इसलिए सरकार और सभी ए...
कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की।
Comments
Post a Comment