सही शिक्षा क्या है










सही शिक्षा क्या है?
सही शिक्षा क्या है?


इस बारे में जानने से पहले हमसे पहले यह जानना आवश्यक है कि शिक्षा क्या है?
शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की शिक्षा शिक्ष् धातु में प्रत्यय अ ’ प्रत्यय लगाने से बना है। 'शिक्ष्' का अर्थ है सीखना और सिखाना। 'शिक्षा' शब्द का अर्थ हुआ सीखने-सिखाने की क्रिया।
व्यापक अर्थ में शिक्षा उसका यह सीखना-सिखाना विभिन्न समूहों, त्योहारों, पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन आदि से अनौपचारिक रूप से होता है। यही सीख-सिखाना शिक्षा के व्यापक और विस्तृत रूप में आते हैं। किसी समाज में सदैव चलने वाली सोद्देश्य सामाजिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का विकास, उसके ज्ञान और कौशल में वृद्धि और व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है और इस प्रकार उसे सभ्य, सुसंस्कृत और योग्य नागरिक बनाया जाता है। मनुष्य क्षण-प्रतिक्षण नए-नए अनुभव प्राप्त करता है व करवाता है, जिससे उसका दिन-प्रतिदन का व्यवहार प्रभावित होता है।


संकुचित अर्थ में शिक्षा: - समाज में एक निश्चित समय और निश्चित स्थानों (विद्यालय, महाविद्यालय) में सुनियोजित ढंग से चलने वाली एक सोद्देश्य सामाजिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा छात्र निश्चित पाठ्यक्रम को पढ़कर संबंधित परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना सीखता है।
शिक्षा के प्रकार
1. औसत शिक्षा

वह शिक्षा जो विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में चलती हैं, औसत शिक्षा कही जाती है। इशिक्षा के उद्देश्य, पाठ्यचर्या और शिक्षण विधियां, सभी निश्चित हैं। यह योजनाबद्ध होता है और इसकी योजना बड़ी कठोर होती है। इसमें सीखने वालों को विद्यालय, महाविद्यालय या विश्वविद्यालय की समयकालीन के अनुसार कार्य करना होता है। इसमें परीक्षा लेने और प्रमाण पत्र प्रदान करने की व्यवस्था होती है।इस शिक्षा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। यह व्यक्ति में ज्ञान और कौशल का विकास करता है और उसे किसी व्यवसाय या उद्योग के लिए योग्य बनाता है। लेकिन यह शिक्षा बड़े व्यय-साध्य होती है। इससे धन, समय और ऊर्जा सभी अधिक खर्च करने पड़ते हैं।
निरुद्देश्य शिक्षावह शिक्षा जो तापमान शिक्षा की भाँति विद्यालय, महाविद्यालय, और विश्वविद्यालयों की सीमा में नहीं बाँधी जाती है।] लेकिन शिक्षा शिक्षा की तरह इसका उद्देश्य व पाठ्यचर्या निश्चित होती है, बात केवल उसकी योजना में होती है जो बहुत मजबूत होती है। इसका मुख्य उद्देश्य सामान्य शिक्षा का प्रसार और शिक्षा की व्यवस्था करना होता है। इसकी पाठ्यचर्या सीखने वालों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निश्चित की गई है।शिक्षण विविधताओं और सीखने के स्थानों व समय आदि सीखने वालों के व्यवहारान के अनुसार निश्चित होता है। प्रौढ़ शिक्षा, सतत् शिक्षा, खुली शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा, ये सब निरूपित शिक्षा के ही विभिन्न रूप हैं।
इस शिक्षा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके द्वारा उन बच्चों / व्यक्तियों को शिक्षित किया जाता है जो सफल शिक्षा का लाभ नहीं उठा पाए - जैसे
वे लोग जो विद्यालयी शिक्षा नहीं पा सके (या पूरी तरह से नहीं पाए गए),
प्रौढ़ व्यक्ति जो पढ़ना चाहते हैं,
कामकाजी महिलाएं,
जो लोग शैक्षिक शिक्षा में ज्यादा खर्च करते हैं (धन समय या ऊर्जा किसी भी स्तर पर खर्च नहीं करते हैं।)

इस शिक्षा द्वारा व्यक्ति की शिक्षा को निरन्तरता भी प्रदान की जाती है, उन्हें अपने-अपने क्षेत्र के नए-नए अविष्कारों से परिचित कराया जाता है और तत्कालीन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अध्ययन किया जाता है।
अनौपचारिक शिक्षा (अनौपचारिक शिक्षा)


वह शिक्षा जिसकी कोई योजना नहीं बनी है; जिनके न उद्देश्य निश्चित होते हैं वे ही न होते हैं पाठ्यचर्या है और न शिक्षण विधियाँ और जो आकस्मिक रूप से सदैव चलती रहती है, उसे अनौपचारिक रूप से देखा जाता है। यह शिक्षा मनुष्य के जीवन भर चलती है और इसका उस पर सबसे अधिक प्रभाव होता है। मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्षण में इस शिक्षा को लेता रहता है, प्रत्येक क्षण वह अपने संपर्क में आए व्यक्तियों व वातावरण से सीखता रहता है। बच्चे की पहली शिक्षा अनौपचारिक वातावरण में घर में रहकर ही पूरी होती है। जब वह स्कूल में उत्कृष्ट शिक्षा ग्रहण के आती है तो एक व्यक्तित्त्व के साथ आता है जो कि उसकी अनौपचारिक शिक्षा का प्रतिरूप है।)




व्यक्ति की भाषा व आचरण को उचित दिशा देने, उसके अनुभवों को व्यवस्थित करने, उसे उसकी रुचि, रुझान और योग्यता के रूप में किसी भी कार्य विशेष में प्रशिक्षण करने और जन शिक्षा के प्रचार और प्रसार के लिए हमें सामान्य और निरर्थक शिक्षा का विधान करना आवश्यक होता है ।


सही शिक्षा क्या है?

सही शिक्षा वह है जो व्यक्ति का सम्पूर्ण मानसिक विकास करे और उसे एक अच्छा इंसान बनाए ।
   सही शिक्षा वह है जो व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करती है और व्यक्ति की बुराईयां छुड़वा कर उसे एक सुसभ्य संस्कार वान, सुसंस्कृत,नीतिज्ञ, ईश्वर से डरकर कार्य करने वाला बनाती है।
आज के इस भागमभाग और असंतोष भरे वातावरण में सही शिक्षा के अभाव में मनुष्य  का जीवन नरक हो गया है।
आज बड़े बड़े स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में जिस प्रकार की शिक्षा दी जाती है उससे समाज में कोई भी सुधार नजर नहीं आ रहा है क्योंकि उनकी शिक्षा नीति  में कोई भी सुधार नहीं हुआ है। केवल अक्षर ज्ञान और व्यवसायिक शिक्षा नीति का ही अनुसरण किया जा रहा जिसके फलस्वरूप आज का शिक्षित और युवा वर्ग भी ठगी, बेईमानी, रिश्वतखोरी, लूट, खसोट, मिलावट, चोरी , कालाबाजारी,जमाखोरी, झूठ, नशा करना, बड़ों का अनादर, अपमान करना जैसे कार्य में संलग्न और लिप्त है।
   क्या इस शिक्षा को सही शिक्षा कहा जा सकता है?
   अर्थात् नहीं।
   अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर सही शिक्षा कहां मिलती है?
इस परिप्रेक्ष्य में अनुसंधान और अन्वेषण करने पर जो नतीजा सामने आया है जिस निष्कर्ष पर पहुंचे उसे जानने के बाद हम आश्चर्य चकित रह गए।
सही शिक्षा केवल एक पूर्ण संत के सत्संग सुनने से ही प्राप्त होती है जिसका अनुकरण करने से यह लोक और परलोक दोनों ही सुखमय हो जाते हैं।
   अब यहां प्रश्न यह उठता है कि इस दुनिया में तो लाखों संत बने हुए हैं इनमें से कौनसा संत पूर्ण संत हैं?
 इस परिप्रेक्ष्य में अनुसंधान किया तो पाया कि वर्तमान में पूरे विश्व में केवल एक ही संत पूर्ण संत हैं और वह है जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज।
    आईये जानते हैं कैसे?
पवित्र गीता जी में पूर्ण गुरु की पहचान है
श्रीमद्ब्रत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग को बताएगा वह पूर्ण गुरु / सच्चा सद्गुरु है।
यह तत्वज्ञान केवल पूर्ण संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं। पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लें, अपना कल्याण करें।

💎कबीर परमात्मा ने अपने धर्म धर्मदास को बताया कि जो मेरा संत सतभक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी संत व महंत झगड़ा करेंगे यह उसकी पहचान होगी।
जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावे।
वाके संग सब राड बढ़ावे ।।
यह सब बातें सच सतगुरु रामपाल जी महाराज पर ही लागू उतरती हैं।

💎सतगुरु की पहचान संत गरीबदास जी की वाणी में -
“सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बान विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध। ”
पूर्ण संत चारों ओर वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकारी होगी। अर्थात् उनका सार निकाल कर बताएगा। 
सभी एम्पग्रन्थों का सार केवल पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी ने ही बताया है।


कीवेदों में पूर्ण गुरु की पहचान
यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि पूर्ण गुरु वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों और एक चौथाई श्लोकों को 
पूरा करके विस्तार से बता देंगे और तीन समय की पूजा बता देंगे।
ऐसा केवल पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।

💎 तत्वदर्शी सन्त वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है वह वहद के जानने वाला कहा जाता है।
- यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25

💎कुरान में पूर्ण गुरु की पहचान
कुरान ज्ञान दाता हजरत मुहम्मद जी को कहना है कि उस अल्लाह की जानकारी किसी बाख़बर इल्मवाले संत से।
वह बाख़बर इल्मवेल संत रामपाल जी महाराज हैं जो अल्लाह की सम्पूर्ण जानकारी रखते हैं। पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लें, अपना कल्याण करें।

💎पवित्र कबीर सागर में पूर्ण गुरु की पहचान
पूर्ण संत तीन प्रकार के मंत्रों को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ 265 पर बोध सागर में मिलता है। गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 व समवेद संख्या 822 में मिलती है।
संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत हैं जो तीन प्रकार के मंत्रों का तीन बार में उपदेश करते हैं।


पूर्णश्री नानक देव जी की वाणी में पूर्ण गुरु की पहचान
जै पंडित तु पढि़या, बिना दुआ अखर दुआ नामा।
प्रणत नानक एक लाहा, जे कर सच समावा।

गुरु नानक जी महाराज अपनी वाणी द्वारा समाझाना चाहते हैं कि पूर्ण सतगुरु वही है जो दो अक्षर के जाप के बारे में जानता है।

प्रमाणगुरु नानक देव जी की वाणी में प्रमाण: -
चहौं का संग, चहौं का मीत, जात चारि हटावै नित।
मन पवन को राखै बंद, लहे त्रिकुटी त्रिवैणी संध ।।
पूर्ण सतगुरु वही है जो तीन बार में नाम दे और स्वांस की क्रिया के साथ सुमिरण का तरीका बताए। केवल जीव का मोक्ष संभव है। 

💎प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी में पूर्ण सन्त का प्रमाण
नास्त्रेदमस ने कहा है कि सन् 2006 में एक हिंदू हिंदू प्रकट होगा अर्थात् संसार में उसकी चर्चा होगी। वह संत न तो मुसलमान होगा, न वह इसाई होगा वह केवल हिन्दू ही होगा। उस द्वारा बताया गया भक्ति मार्ग सभी से भिन्न और तथ्यों पर आधारित होगा।
यह भविष्यवाणी केवल संत रामपाल जी महाराज जी पर ही खरी  उतरतीहै।


जन्म-मरण का दीर्घ रोग सत्य नाम और सार नाम बिना समाप्त नहीं हो सकता है। ये सत्य मंत्र केवल पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी ही प्रदान करते हैं। उनसे नाम उपदेश लें और मोक्ष प्राप्त करें।

💎पूर्ण संत की पहचान होती है कि वर्तमान के धर्म गुरु उसके विरोध में खड़े होकर राजा व प्रजा को गुमराह करके उसके ऊपर अत्याचार करवाते हैं।
   उपरोक्त सभी बातें पूरे विश्व के सभी संतों और गुरुओं में केवल संत रामपाल जी महाराज के ऊपर ही सटीक बैठती है। संत रामपाल जी महाराज का सामाजिक सुधार और उत्थान में योगदान।

  संत रामपाल जी महाराज की सही शिक्षा का ही परिणाम है है कि उनके शिष्य ना तो कोई किसी भी प्रकार का नशा करते हैं और ना ही किसी को कोई नशीली वस्तु लाकर ही देते हैं। संत रामपाल जी महाराज की शिक्षा पाकर लोग दुर्व्यसन और सामाजिक बुराइयों जैसे मृत्युभोज, दहेज़ प्रथा आदि कुप्रथाओं को त्याग रहे हैं।
   संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित होकर उनके शिष्य सामाजिक सुधार और मानव सेवा में सदा ही आगे रहते हैं।

  

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