भाई दूज कितनी सहायक

    भाई दूज कितने सहायक है एक भाई की रक्षा करने में। इसकी जानकारी से पहले हमें यह जानना बहुत जरूरी है कि यह भाई दूज है क्या और यह क्यों मनाया जाता है? इसको मनाने के पीछे क्या मान्यता है और इसकी उपयोगिता क्या है?
        भाई दूज क्या है?


         भाई दूज दीपावली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है।
        भाई दूज कैसे मनाया जाता है?
        भाई दूज के दिन भाई अपनी बहन के घर जाता है वह उसके लिए और बहन के ससुराल वालों के लिए स्नेहवश नए वस्त्र, फल, मिठाइयां आदि लेकर जाता है। बहनें गोबर के भाई दूज बनाती हैं और उनकी पूजा अर्चना करती हैं और अपने भाई की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं। भाई को केक लगाती हैं उसकी आरती उतारती हैं। भाई अपनी बहन और उसके ससुराल वालों के लिए लाई गई सामग्री उन्हें भेंट करता है।
          भाई दूज मनाने के पीछे की कहानी
          भाई दूज मनाने के पीछे की कई कहानियों समाज में प्रचलित हैं जिनमें से एक कहानी यह भी है।  एक पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेव और उनकी पत्नी जिसका नाम छाया था। उससे उत्पन्न पुत्र पुत्री यमराज और यमुना थे। यमुना की शादी के बाद यमुना अपने भाई यमराज से बार बार यह अनुरोध किया था कि आप कभी भी हमारे घर नहीं आते हैं किसी दिन आप मेरे घर पर अवश्य आयें। पहले तो यमराज अपने कार्य में व्यस्तता के कारण नहीं जाते थे लेकिन एक दिन उनके विचार आया कि कोई भी मुझे अपने घर पर बुलायाकर राज़ी नहीं होता है लेकिन बहिन इतना अनुरोध किया करती हैं तो एक दिन उसके घर पर अवश्य जाना चाहिए। यह सोचकर एक दिन यमराज अपनी बहिन यमुना के घर पर पहुंच जाता है। वह दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया का था।उस यमुना देवी अपने भाई यमराज को अपने घर पर आया हुआ देखकर बहुत खुश होती है और अपने भाई सादर भोजन करवाती है।) यमराज उसकी सेवा से बहुत प्रसन्न होते हैं और उसे कोई वरदान मांगने के लिए कहते हैं। इस बात पर यमुना देवी यह वरदान मांगती हैं कि जो बहिन आज दिन मेरी तरह अपने भाई को टीका करे और उसकी भावनाओं को ठीक रखें। यमराज ने उसे तथास्तु कहा और यमलोक के लिए प्रस्थान किया। उसी दिन से मान्यता है जो बहिन इस दिन अपने भाई के केक लगाती है और उसकी पवित्रता करती है तो उसके भाई को यमराज का कोई डर नहीं रहता है।
        आइए अब जानते हैं कि भाई दूज भाई की रक्षा करने में कितने सहायक हैं?
          जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर साल बहिनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए भाई दूज का व्रत रखती हैं और भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है। उसके पश्चात भी कई बहिनों के भाई भाई दूज के दिन ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। अब विचार करने वाली बात यह है कि आखिर इसका कारण क्या है?
           यदि उपरोक्त क्रियाएं करने के बाद भी बहिनों के भाई नहीं बच पाते हैं तो फिर क्या किया जाए कि दुनिया में किसी भी भाई बहिन की अकाल मौत नहीं हो और उनकी रक्षा हो।
             इसका अनुसंधान किया तो पाया कि उपरोक्त सभी क्रियाएं शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण होने के कारण साधक को कोई भी लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है और न ही उनकी रक्षा हो रही हैं ।
              ये शास्त्र विधि के अनुसार साधना क्या है?
                शास्त्र विधि के अनुसार साधना वह है जो हमारे सभी पवित्र धर्म शास्त्रों (पवित्र वेदों, गीता, बाइबल क़ुरान गुरु ग्रंथ साहिब आदि में वर्णित है। जब किसी तत्वदर्शी संत की शरण में जाकर शास्त्र विधि के अनुसार सत भक्ति साधना की जाती है तो उस साधक को पूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं और उसकी अकाल मौत से भी रक्षा होती है।

                 वर्तमान में पूरे विश्व में केवल एक ही संत हैं जो तत्वदर्शी संत हैं। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज।
                  इनके द्वारा बताई जा रही सत भक्ति साधना से साधकों को पूर्ण लाभ, सर्व सुख प्राप्त हो रहे हैं और उनकी अकाल मौत भी टल रही हैं और कैंसर, एड्स,लकवा,माइग्रेन, हृदय घात जैसी लाईलाज और भयंकर बीमारियां भी ठीक हो रही हैं। आप भी उनके सत्संग सुनें, ज्ञान को समझें और उनसे नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर सत भक्ति करें और अपना कल्याण करवाएं।
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